जागतीं हैं जब आँखें हसीन यादों में तमाम रात, सुबहों का आलम भी हदें पार कर जाये ,
वास्ता है तुझे पाक-ए-मोहब्बत की मेरे मालिक, झलक भर मुझे महबूब का दीदार हो जाये...
वास्ता है तुझे पाक-ए-मोहब्बत की मेरे मालिक, झलक भर मुझे महबूब का दीदार हो जाये...