इस बार ना मिला वो हर बार की तरह ..
उस का खुलूस गिर गया दीवार की तरह ...
अजी हमसे ना यूं मिलिए अदाकार की तरह...
क्योंकि हम भी चेहरे पढ़ते हैं अख़बार की तरह ....
Saturday, 25 December 2010
Tuesday, 21 September 2010
Friday, 3 September 2010
हवायें....
अभी रोशन हैं चाहत के दीये हम सबकी आँखों में
बुझाने के लिये पागल हवाएँ रोज़ आती हैं......
बुझाने के लिये पागल हवाएँ रोज़ आती हैं......
ये सच है नफ़रतों की आग ने सब कुछ जला डाला
मगर उम्मीद की ठंडी हवाएँ रोज़ आती हैं......
मगर उम्मीद की ठंडी हवाएँ रोज़ आती हैं......
Thursday, 19 August 2010
"Sukhi": खुदा नहीं , न सही आदमी का ख्वाब सही ..... कोई हसीन...
"Sukhi": खुदा नहीं , न सही आदमी का ख्वाब सही .....
कोई हसीन...: "खुदा नहीं , न सही आदमी का ख्वाब सही ..... कोई हसीन नजारा तो है नजर के लिए ... वो मुत्मयीं हैं की पत्थर पिघल नहीं सकता ... मैं बेकरार हूँ आ..."
कोई हसीन...: "खुदा नहीं , न सही आदमी का ख्वाब सही ..... कोई हसीन नजारा तो है नजर के लिए ... वो मुत्मयीं हैं की पत्थर पिघल नहीं सकता ... मैं बेकरार हूँ आ..."
Monday, 16 August 2010
man ki dasha
तमाम रात तेरे मयकदे में मय पी है
तमाम उम्र नशे में निकल न जाये कहीं ....
कभी मचान पे चढ़ने की आरजू उभरी ,
कभी ये डर की ये सीढ़ी फिसल न जाये कहीं .....
तमाम उम्र नशे में निकल न जाये कहीं ....
कभी मचान पे चढ़ने की आरजू उभरी ,
कभी ये डर की ये सीढ़ी फिसल न जाये कहीं .....
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