हवाओं की ये खुसर-फुसर ये गुफ्तगू , बहारों की ये शोख़-अदा ये जुस्तजू ,
भौरों का ये क्रंद-विनय ये आरजू , झरनों की ये कल छल-छल ऐ आब तू ,
मेघों का जो रंग-साज यौवन-खुशबू , पौधों का वो वर्ण-हरित श्रृंगार तू ,
दूर तलक फैला वसुधा का आँगन-भू , ह्रदय कहे तेरे आँचल को चूम लूं ...
भौरों का ये क्रंद-विनय ये आरजू , झरनों की ये कल छल-छल ऐ आब तू ,
मेघों का जो रंग-साज यौवन-खुशबू , पौधों का वो वर्ण-हरित श्रृंगार तू ,
दूर तलक फैला वसुधा का आँगन-भू , ह्रदय कहे तेरे आँचल को चूम लूं ...