"Sukhi": खुदा नहीं , न सही आदमी का ख्वाब सही .....
कोई हसीन...: "खुदा नहीं , न सही आदमी का ख्वाब सही ..... कोई हसीन नजारा तो है नजर के लिए ... वो मुत्मयीं हैं की पत्थर पिघल नहीं सकता ... मैं बेकरार हूँ आ..."
Thursday, 19 August 2010
Monday, 16 August 2010
man ki dasha
तमाम रात तेरे मयकदे में मय पी है
तमाम उम्र नशे में निकल न जाये कहीं ....
कभी मचान पे चढ़ने की आरजू उभरी ,
कभी ये डर की ये सीढ़ी फिसल न जाये कहीं .....
तमाम उम्र नशे में निकल न जाये कहीं ....
कभी मचान पे चढ़ने की आरजू उभरी ,
कभी ये डर की ये सीढ़ी फिसल न जाये कहीं .....
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