Saturday, 16 April 2011

बचपन ....

बचपन की मीठी बातों में ,
वो इठलाना याद आता है ,
जब बड़ों के कन्धों पे चढ़कर ,
'राजा' बनना याद आता है,
जब माँ की मीठी डांट में भी,
झूठा गुस्सा याद आता है ,
जब शाम को खेल-धमाल के बाद,
धूल-भरा पाँव याद आता है ,
जब दिन की खूब शरारत में ,
बाबा का गुस्सा याद आता है ,
तब लगता है बचपन भला था,
जब पल-छिन मुझे सताता है .