Saturday, 25 December 2010

इस बार ना मिला वो हर बार की तरह ..
उस का खुलूस गिर गया दीवार की तरह ...
अजी हमसे ना यूं मिलिए अदाकार  की तरह...
क्योंकि हम भी चेहरे पढ़ते हैं अख़बार की तरह ....

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